बलिया : आखिरी जुम्मा को अदा की गई अलविदा की नमाज





रमजान के अंतिम जुमे की नमाज के दौरान इबादतों की कबूलियत को लेकर खुदा से दुआ करते लोग

बलिया। माह- ए- रमजान की अलविदा जुमा की नमाज शुक्रवार को जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण इलाकों के विभिन्न मस्जिदों में अदा की गई। इस मौके पर जिलाधिकारी रवींद्र कुमार एवं पुलिस कप्तान देव रंजन वर्मा ने प्रमुख मस्जिदों का जायजा लिया। साथ ही सभी छोटे-बड़े मस्जिदों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
कहा जाता है कि “अलविदा जुमे में नमाज अदा कर लोग जो जायज दुआ मांगते हैं वह पूरी होती है। साथ ही अल्लाह की रहमत और बरकत मिलती है। साथ ही व्यक्ति को अपने गुनाहों की माफी मिलती है। अलविदा जुमे के बाद ईद का पर्व मनाया जाएगा।
जिला मुख्यालय सहित विभिन्न क्षेत्रों में रमजान माह के अलविदा जुमा की नमाज अदा की गई। इस अवसर पर नमाजियों की संख्या में बढ़ोतरी होने के कारण प्रमुख मस्जिद कमेटियों द्वारा पानी सहित ध्वनि विस्तारक यंत्र का बेहतर इंतजाम किया गया था। शहर के बिशुनीपुर स्थित जामा मस्जिद में नमाज- ए- अलविदा जुमा अदा हुई। जबकि बहेरी, दिमागी चट्टी समेत कई प्रमुख मस्जिदों में मौलाना द्वारा नमाज अदा कराई।

नमाज- ए- अलविदा जुमा को लेकर मुस्लिम मोहल्लों में आज सुबह से ही चहल-पहल देखी गई। खास कर बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया। छोटे-छोटे बच्चे आज नए-नए कपड़े पहन कर नमाज-ए-अलविदा जुमा अदा की। अलविदा जुमा की नमाज अदा करने के लिए नमाजी पूर्वाह्न 11 बजे से ही मस्जिदों में दाखिल होने लगे थे। अलविदा जुमा के अवसर पर जकात व फितरा मांगने वालों की भीड़ सभी मस्जिदों के पास देखने को मिली। इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपने-अपने घर के मरहुमिनों के नाम से गरीबों को इफ्तार कराने के साथ ही खाना खिलाया गया।
रमजान- उल -मुबारक महीने के दौरान पढ़ी गई कुरआन- ए- पाक को बख्शवाया।

अलविदा जुमा के अवसर पर उपस्थित नमाजियों को संबोधित करते हुए मस्जिद के मौलाना ने कहा कि हम सभी रमजान- उल- मुबारक को अलविदा कहने के लिए इकट्ठा हुए हैं। हम सभी लोगों को सिर्फ रमजान-उल- मुबारक को अलविदा कहना है न कि नमाज को। उन्होंने कहा कि जिस तरह रमजान- उल- मुबारक के दौरान लोग खुदा की इबादत करने के साथ ही नमाज अदा करते थे। उसे जारी रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हर मुसलमान को जकात व फितरा निकाल कर गरीबों में तकसीम करनी चाहिए। ताकि गरीब व असहाय लोग भी खुशी-खुशी ईद का त्योहार मना सकें।





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